वायु प्रदुषण - एक गंभीर समस्या

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भारत : स्वतंत्र अध्ययनों की एक श्रृंखला ने पता लगाया है कि यह वायु प्रदूषण कितना व्यापक है और मानवीय स्वास्थ्य तथा समस्त महादेशों की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत बुरा प्रभाव होगा। धुंएदार शहरों की सड़कों पर मास्क पहने हुए लोगों की तस्वीर ने हाल ही के सालों में वायु प्रदूषण द्वारा स्वास्थ्य जोखिमों के लिए पूरी तरह से ध्यान केंद्रित कर दिया है। वायु प्रदूषण ने अकेले ही 2014 में 3.2 समय-पूर्व मृत्यु में अपना योगदान देते हुए, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव का खुलासा किया है। इनमें से यूरोप, चीन में दो-तिहाई मृत्यु शामिल हैं और एशिया के अन्य देशों में यह तेजी से विकसित हो रहा है।

इसके अलावा, मोबाइल इनडोर एयर प्यूरिफिकेशन तकनीकों में वैश्विक लीडर, ब्लुएयर द्वारा पता लगाया गया है कि, नवीनतम जानकारी यह बताते हैं कि वायु प्रदूषण लंग कैंसर, हर्ट अटैक्स, स्ट्रोक्स और अस्थमा आदि से अब सीधे स्पष्ट रूप से शामिल होता जा रहा है, परिणामस्वरूप यूरोप, एशिया और चीन में हर साल समय-पूर्व मृत्यु हो रही है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्लूएचओ) के वर्तमान सर्वे में पाया गया है कि विश्व के सबसे अधिक प्रदूषित 20 शहर भारत में हैं। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार राजधानी दिल्ली, विश्व का सबसे अधिक प्रदूषित शहर है। वर्तमान की एंवायॉर्मेंटल प्रेफरेंस इंडैक्स ने भारत को वायु गुणवत्ता के लिए 178 देशों में से 174 स्थान का रैंक दिया है। डब्लूएचओ बताता है कि, यह भारत में समय-पूर्व मृत्यु का एक प्रमुख कारण बन गया है, जिसमें हर साल 620,000 लोगों की मृत्यु प्रदूषण-संबंधी रोगों के कारण हो रही है।

बेंग्ट रिट्री, सीईओ और ब्लूएयर के फाउंडर ने कहा कि, इनडोर और आउटडोर वायु प्रदूषण के कारण मानवीय स्वास्थ्य तथा आर्थिक विकास पर निरंतर होने वाला खतरा इसका साक्ष्य है और वैज्ञानिक शंका से परे है। श्री. रिट्री ने 1990 के मध्य में हाई-टेक इनडोर एयर प्युरिफिकेशन कंपनी बनाई थी, क्योंकि उनका मानना था कि स्वस्थ वायु में सांस लेना एक मौलिक मानव अधिकार है। ब्लूएयर प्यूरिफायर इनडोर वायु जनित हानिकारक तत्वों, जैसे कि धूल, धुंआ और एलेर्जन्स आदि को 99-97 प्रतिशत तक हटाता है। इस साल के आरंभ में दिल्ली में यू.एस एंबैसी ने अपनी सुविधा हेतु 1800 ब्लूएयर यूनिट्स खरीदी की रिपोर्ट की गई थी।

विश्व बैंक की नवीनतम आर्थिक मूल्यांकन के अनुसार, भारत में कण प्रदूषण से गंभीर स्वास्थ्य परिणामों की लागत उसके सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत है और पर्यावरणीय दुर्दशा की मात्रा 3.75 ट्रिलियन रुपए (यूएस $ 80 बिलियन) पर होने के कारण कुल क्षति है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद के 5.7 प्रतिशत के बराबर है।

विश्व बैंक द्वारा गिनती की गई नवीनतम संख्या और भी चौंकाने वाली है। विस्तृत पर्यावरणीय कारकों से होने वाले स्वास्थ्य के खतरे का मूल्यांकन किया गया है – जिसमें वायु प्रदूषण, अपर्याप्त पानी आपूर्ति और खराब रहन-सहन शामिल हैं – यह दर्शाते हैं कि भारत में आउटडोर वायु प्रदूषण अपने चरम स्तर पर है। इसके बाद इनडोर वायु प्रदूषण का स्तर है।

मिश्रित आउटडोर और इनडोर वायु प्रदूषण की दर, भरतीय अर्थव्यवस्था पर उच्चतम वार्षिक बोझ है। आउटडोर वायु प्रदूषण की मात्रा 29 प्रतिशत है जबकि इसके बाद इनडोर वायु प्रदूषण की मात्रा 23 प्रतिशत है।

कण संबंधी प्रदूषण के आउटडोर और इनडोर वायु प्रदूषण की उच्चतम दर युवाओं और प्रॉडक्टिव शहरी लोगों में अधिक पाया गया है। जिसके कारण वयस्कों में कार्डियोपलमोनरी और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिजीसेस के कारण होने वाली मृत्यु दर अधिक है।

श्री. रिट्री ने कहा कि, बड़ी समस्या यह है कि अधिकांश लोग वायु प्रदूषण को गंभीर समस्या के रूप में नहीं मानते हैं, भले ही आप दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे धुंए वाले शहर में क्यों न रह रहे हों। मोटापा और एल्कोहल सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन अभी भी लोग आधुनिक वायु प्रदूषण से होने वाले घातक खतरे को नहीं समझ पा रहे हैं। डीजल के धुंए, धूल और केमिकल्स के जहरीले मिक्स को धन्यवाद, जो पूरुषों, महिलाओं और बच्चों को आधुनिक शहर में निष्क्रिय धूम्रपान की ओर ले जा रहे हैं।

श्री रिट्री ने आगे कहा कि, वायु प्रदूषण के लिए प्रभावशाली तरीके से पता लगाना चाहिए, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरणों को इस समस्या के बारे में जागरुकता फैलाने, जीवन बचाने के लिए कार्यसक्षम होने और स्वास्थ्य समस्या दरों को घटाने के लिए युद्धस्तर पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कानून निर्माताओं से बेहतर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम्स विकसित करने की मांग की है, ताकि उन्हें मोबाइल एप्लिकेशंस से लिंक किया जा सके, जैसा कि ब्लूएयर के खुद का एयर क्वालिटी ऐप (भारत में एपल और एंड्रॉइड दोनों फोन्स के लिए उपलब्ध) है, जो लोगों को यह जानकारी दे कि वे कैसी वायु में सांस ले रहे हैं।

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