रेलवे ने मुहैया कराई मात्र 6 फुट की फ्री पार्किंग

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Panchkula:

पंचकूला। पंचकूला रेलवे स्टेशन की और से लोगों को पार्किंग के लिए बहुत परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। हर रोज़्ा पार्किंग को लेकर झगड़े होते हैं। आपस में गाली गलौज होती है, गाडिय़ां आपस में टकराती हैं, जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पंचकूला समाचार की टीम ने पार्किंग का सर्वे किया तो फ्री पार्किंग की प्रशासन द्वारा कोई जगह नहीं छोड़ी गई। केवल पत्थर रख कर 6 फुट की जगह में से गाडिय़ों को गुजरना पड़ता है, जिससे गाडिय़ां पत्थरों से टकराती रहती हैं। यात्रियों के लिए सामान उतारने के लिए कोई खाली जगह तक नहीं छोड़ी गई है। जब इस  बाबत वहां के ठेकेदार राम विनय शर्मा से पूछा गया तो उनका कहना था कि हमें रेलवे प्रशासन ने फ्री पार्किंग के लिए कोई जगह नहीं दी। हमने अपनी तरफ से जनता की सुविधा के लिए पत्थर रख कर रास्ता दिया है। हम छोड़ी हुई जगह के भी पैसे देते हैं। प्रशासन ने तीन मीटर का रास्ता छोड़ा है इसके अलावा सवा मीटर का रास्ता हमने अपनी पार्किंग से छोड़ा है तब जाकर गाड़ी निकलने का रास्ता बना है। साथ ही उन्होंने बताया कि तीन माह के बाद हमें प्रशासन को दोबारा कोटेशन देनी पड़ती है। सर्विस टैक्टस और 2' इनकम टैक्स प्रशासन ले रहा है इसके अतिरिक्त हमें ठेके की जो राशि देनी पड़ती है वो अलग है। 

   

इसके अलावा अफसरों को भी फ्री पार्किंग देनी पड़ती है। स्टैंड के बाहर खड़े दुपहिया वाहनों के बारे में जब ठेकेदार शर्मा से पूछा गया कि तो उनका कहना था कि ये वाहन रेलवे के कर्मचारी खुद ही यहां खड़े कर जाते हैं लेकिन जब पंचकूला समाचार की टीम ने देखा तो अन्य लोगों के बाहर खड़े कराकर उनकी रसीद काटी जा रही थी। जबकि दुपहिया वाहनों के लिए ठेकेदार को जगह मुहैया कराई गई है। इसके बावजूद ये लोग वाहन बाहर खड़े कराते हैं। यहां पर आने वाले यात्रियों से पार्किंग के बारे में बात कि गई तो उनका कहना था कि जो जगह इन्होंने गाड़ी से यात्रियों का सामान छोडऩे के लिए लेन बनाई हुई है, उससे यात्रियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि जब शताब्दी या अन्य रेलगाड़ी के आने का समय होता है तो इस बनाई हुई लेन में कारों की कतार लग जाती है जिससे सबसे पिछली गाडियों को काफी दूर से सामान उठा कर स्टेशन पर पहुंचना पड़ता है और तो और सीनियर सिटीजंस, विकलांग या अन्य हैंडिकैप्ड व्यक्ति के लिए पलेटफार्म तक पहुंचने के लिए कोई सुविधा नहीं है। इस लेन में रिक्शा, आटो रिक्शा भी खड़े रहते हैं, जिससे हर वक्त जाम की स्थिति बनी रहती है। 

अगर किसी बुजुर्ग अथवा महिला के साथ दुर्घटना हो जाती है तो कोई पुलिस कर्मी मदद के लिए यहां दूर-दूर तक नजर नहीं आता। इतना ही नहीं अभी तक कोई एस्केलेटर भी इधर नहीं लगाया गया, मगर आश्वासन जरूर मिलता है कि जल्द ही इधर भी एस्केलेटर लगा दिया जाएगा।

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