हिमाचल का हर टूरिस्ट सेंटर पिछले कुछ दिनों से जैम पैक है। उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों के टूरिस्ट यहां डटे हुए हैं। वीकेंड में शिमला, मनाली, डलहौजी, मकलोडगंज में तिल धरने को जगह नहीं मिल रही है। पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोग न तो मास्क पहन रहे हैं और न ही सोशल डिस्टेंसिंग को ख्याल रख रहे हैं। कुल मिलाकर एसओपी की शरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।


बसें फुल ऑक्यूपेंसी के साथ दौड़ रही हैं और ड्राइवर -कंडक्टर तक मास्क नहीं पहन रहे हैं। मनाली में बीते सप्ताह दस हजार से ज्यादा टूरिस्ट आए हैं। जिसके फोटोज सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।
सरकार ने लोगों को आगाह करते हुए कहा कि जिस तरह से लोग बिना किसी सावधानी के मौजमस्ती करने के लिए हिल स्टेशनों पर निकल पड़े है, वह कतई सही नहीं है। वे न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं और न ही मास्क लगा रहे हैं। बाजारों में दोबारा भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।
#Watch this little kid in #Dharamshala instilling civility in an already ‘civilised’ crowd.
Tourists spotted throwing #COVID norms to wind after Himachal govt opened the markets for business pic.twitter.com/xsOWJMVjHj
— (@ShadesOfKittu) July 6, 2021
यह बेहद खतरनाक है। यदि लोग नियमों का सही से पालन नहीं करते हैं, तो एक बार फिर पाबंदियों में दी गई ढील वापस ली जा सकती है।
यहां बाजारों में भारी भीड़ दिख रही है। कहीं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर बेशक नरम पड़ी है, लेकिन अभी लोगों को कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते रहना है। हिल स्टेशनों की यात्रा करने वाले लोग लापरवाही कर रहे हैं। वे कोरोना उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं कर रहे हैं।
अब तक कोरोना की दूसरी लहर से निपटने में मिली बढ़त को कोरोना प्रोटोकॉल तोडऩे वाले लोग खत्म कर सकते हैं। अगर प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, तो प्रतिबंधों में ढील फिर रद्द हो सकती है।
